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बिहार में छात्र आंदोलन: नीतीश कुमार की चुप्पी या विपक्षी राजनीति?

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पटना में छात्रों का आंदोलन: ठंड में सड़क पर उतरे हज़ारों छात्र

पिछले 13 दिनों से बिहार के पटना में हज़ारों छात्र ठंड के मौसम में सड़कों पर आंदोलन कर रहे हैं। इन छात्रों की प्रमुख मांग है कि BPSC की प्रारंभिक परीक्षा को रद्द किया जाए और पेपर लीक मामले में सख्त कार्रवाई की जाए। लेकिन बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ओर से इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है।

नीतीश कुमार की चुप्पी: छात्रों की आवाज़ कौन सुनेगा?

छात्रों की मांगों के बावजूद, नीतीश कुमार की ओर से कोई जवाब नहीं मिला है। जब सरकारी अधिकारियों से प्रतिक्रिया मिली, तो उन्होंने परीक्षा रद्द करने की मांग को ठुकरा दिया। इस चुप्पी के बीच, जब छात्र आंदोलन में भाग लेने के लिए सड़कों पर उतरे, तो उनके खिलाफ लाठी-डंडे चलाए गए, और सर्दी में उन पर पानी की बौछार की गई। कई छात्र घायल हुए और अस्पताल में भर्ती हैं, लेकिन इसके बावजूद छात्रों की शिकायतों को नजरअंदाज किया जा रहा है।

राजनीति का तड़का: विपक्षी नेताओं का बयान

इस आंदोलन को लेकर विपक्षी नेता भी दो खेमों में बंट गए हैं। एक ओर जहां तेजस्वी यादव और पप्पू यादव ने प्रशांत किशोर को बीजेपी की ‘B टीम’ बताया है और उन पर आंदोलन को हाईजैक करने का आरोप लगाया है, वहीं प्रशांत किशोर छात्रों के बीच मौजूद रहकर समर्थन दे रहे हैं।

क्या छात्र आंदोलन में राजनीति का एंगल है?

इस आंदोलन के दौरान विपक्षी नेताओं के बीच की खींचतान और राजनीति भी सामने आ रही है। क्या यह आंदोलन आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश है? क्या प्रशांत किशोर की एंट्री से यह आंदोलन और भड़का है?

महादंगल का सवाल: क्या ‘सुशासन बाबू’ को नहीं दिखता छात्रों का दर्द?

इस पूरे घटनाक्रम में एक अहम सवाल उठ रहा है: क्या नीतीश कुमार को छात्रों का दर्द नहीं दिखाई दे रहा? छात्र जो अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं, उनकी आवाज़ पर राजनीति का धुंआ क्यों हो रहा है? यह सवाल बिहार के अगले चुनाव में भी अहम भूमिका निभा सकता है।

निष्कर्ष: बिहार में छात्र आंदोलन और राजनीति की जटिलताएं

बिहार में छात्र आंदोलन के बीच एक गहरी राजनीतिक साजिश भी दिखाई देती है, जहां नेता अपने-अपने फायदे के लिए छात्रों की परेशानियों को उपयोग कर रहे हैं। इस पूरे मुद्दे पर अब सभी की निगाहें नीतीश कुमार पर हैं, जिनकी चुप्पी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

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