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चमोली l मानसून की शुरुआत ने एक बार फिर कहर बरपाना शुरू कर दिया है। राज्य के कई जिलों में भारी बारिश का सिलसिला जारी है, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। चमोली जनपद के नंदानगर विकासखंड क्षेत्र में बीते देर रात मूसलाधार बारिश के कारण अतिवृष्टि की गंभीर घटना सामने आई है। धुर्मा, मोख, सेंतोली और कुण्डी जैसे गांवों में तेज बारिश के कारण भारी तबाही मची है। स्थानीय लोग इसे बादल फटना मान रहे हैं, हालांकि प्रशासन ने इसे “अतिवृष्टि” की श्रेणी में रखा है।
इस प्राकृतिक आपदा का सबसे गहरा असर मोख वैली में देखने को मिला है। यहां मोक्ष नदी के समीप स्थित सेरा गांव अब खतरे की जद में आ गया है। नदी में अचानक जलस्तर बढ़ने के कारण पानी कई घरों में घुस गया। ग्रामीणों को रात्रि के समय अपने घरों से निकलकर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी। इस दौरान कई लोग जान बचाने के लिए अंधेरे में घर छोड़कर जंगलों या ऊंचे स्थानों की ओर भागे। गनीमत रही कि जानमाल की बड़ी हानि नहीं हुई, लेकिन कई मकानों और गौशालाओं को नुकसान पहुंचा है।
भारी बारिश से इलाके की सड़कें भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई हैं। कई जगहों पर सड़कें पूरी तरह से ध्वस्त हो गई हैं, जिससे घाटी का मुख्य बाजार और अन्य क्षेत्रों से संपर्क टूट गया है। इस कारण राहत और बचाव कार्यों में भी बाधा आ रही है। बिजली और संचार सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं।
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन की टीम तत्काल मौके पर रवाना हुई। जिलाधिकारी संदीप तिवारी के निर्देश पर तहसील प्रशासन ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और स्थिति का जायजा लिया। प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का कार्य शुरू कर दिया गया है। जिलाधिकारी ने प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत सामग्री पहुंचाने और आवश्यक सहायता प्रदान करने के निर्देश भी दिए हैं।
प्रभावित ग्रामीणों ने प्रशासन से उचित मुआवजे की मांग की है। उन्होंने कहा कि बारिश और बाढ़ के कारण उनकी आजीविका को भारी नुकसान पहुंचा है। कई घरों में रखा राशन, फसल और मवेशियों का चारा भी बह गया है। वहीं दो गौशालाओं के क्षतिग्रस्त होने की भी पुष्टि हुई है, जिससे पशुधन के लिए संकट खड़ा हो गया है।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और मौसम विभाग से मिले अलर्ट के आधार पर अग्रिम कदम उठाए जा रहे हैं। राहत और बचाव दलों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, पहाड़ी इलाकों में यात्रा कर रहे लोगों से सावधानी बरतने की अपील की गई है।
उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में मानसून के शुरुआती दौर में ही ऐसी घटनाएं चिंता का विषय हैं, और आने वाले दिनों में प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
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