“वीजा नहीं, तो क्या हुआ! जौनपुर की बारात ने ऑनलाइन किया निकाह, दिलों का ‘डिजिटल’ कनेक्शन”

एडिटर, भारत न्यूज लाइव
जौनपुर: जौनपुर में एक शादी ने भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण संबंधों के बावजूद दिलों को एक कर दिया, और इस कहानी में रोमांस, राजनीति और टेक्नोलॉजी का अद्भुत मिश्रण देखने को मिला। कहानी कुछ यूं शुरू हुई कि भाजपा नेता तहसीन शाहिद के बेटे मोहम्मद अब्बास हैदर की शादी पाकिस्तान के लाहौर की रहने वाली अंदलीब जहरा से तय हुई थी। सोचिए, बारात के लिए तैयारियाँ धूमधाम से चल रही थीं, लेकिन एक छोटा सा ट्विस्ट था—वीजा नहीं मिला! अब, वीजा के बिना बारात पाकिस्तान कैसे जाए? पर प्यार ने जब ठान लिया तो इंटरनेट ने रास्ता दिखा दिया!
शादी की तारीख करीब आती गई और वीजा नहीं मिला, जैसे बुलेट ट्रेन के आगे से पटरी ही खिसक गई हो! और फिर, जब दुल्हन की माँ, राना यास्मीन जैदी, भी बीमार पड़ गईं और आईसीयू में भर्ती हो गईं, तो सबकी सांसे थम गईं। तब तहसीन शाहिद ने सोचा, “भई, ये शादी तो किसी भी हालत में होनी चाहिए, वीजा हो या न हो!” और फिर जो हुआ, वो बॉलीवुड की फिल्मों से कम नहीं था—शादी ऑनलाइन कराने का फैसला किया गया।
शुक्रवार की रात, बारात सज-धज कर निकल पड़ी। कोई पाकिस्तान नहीं गया, लेकिन बाराती पूरे जोश में थे। जौनपुर के इमामबाड़ा कल्लू मरहूम में सब लोग इकट्ठा हुए, टीवी स्क्रीन को मंत्रमुग्ध होकर देखा, और दोनों देशों के मौलाना भी ऑनलाइन जुड़े। इधर भारत के मौलाना और उधर पाकिस्तान के मौलाना ने मिलकर शादी को हरी झंडी दिखाई। सोचिए, यह निकाह एक वर्चुअल ब्रिज की तरह बन गया जो दो देशों को जोड़ रहा था, भले ही उनके बीच राजनीतिक बॉर्डर हों!
निकाह की प्रक्रिया कुछ इस तरह रही कि लड़का और लड़की दोनों ने मौलानाओं के सामने हामी भरी, बिल्कुल वैसे ही जैसे आप जूम कॉल पर ‘मीटिंग कंफर्म’ करते हैं। भारत में मौलाना महफूज़ुल हसन खान ने निकाह पढ़ाया और बताया कि इस्लाम में लड़के-लड़की की रजामंदी जरूरी है, और ऑनलाइन भी ये काम आसानी से हो सकता है। निकाह पढ़ने के बाद मौलाना ने कहा, “भाई, जब तक दोनों देशों के बीच की राजनीति ठीक नहीं होती, तब तक हमारे दिलों का पुल इस टेक्नोलॉजी से ही बना रहेगा!”
अब बात आती है दुल्हन की विदाई की। मोहम्मद अब्बास हैदर का दिल इंतजार में धड़क रहा है कि कब अंदलीब का वीजा आए और उनकी दुल्हन भारत की सरजमीं पर कदम रखे। शादी में भाजपा एमएलसी बृजेश सिंह प्रिशु भी पहुंचे और दूल्हे के पिता तहसीन शाहिद को बधाई दी। अब सभी उम्मीद कर रहे हैं कि वीजा जल्द मिले और दुल्हन की विदाई धूमधाम से हो।
इस पूरे वाकये में प्यार, धैर्य और डिजिटल युग का जबरदस्त तालमेल देखा गया, और साथ ही यह सबक मिला कि जब दिलों का कनेक्शन मजबूत हो, तो वीजा और बॉर्डर जैसे मुद्दे छोटी-छोटी तकनीकी समस्याएं बनकर रह जाती हैं।


