राजस्व घाटा अनुदान में कटौती: नए राजस्व स्रोतों की तलाश में राज्य सरकार

एडिटर , भारत न्यूज लाइव
उत्तराखंड । अगले वित्तीय वर्ष तक राज्य को मिलने वाला राजस्व घाटा अनुदान आधा रह जाएगा, जिससे राज्य सरकार के सामने वित्तीय चुनौती और बढ़ जाएगी। वर्तमान में यह अनुदान सरकार के खर्चों को संतुलित करने में सहायक है, लेकिन इसके कम होने से सरकार के लिए नए राजस्व स्रोतों की तलाश अनिवार्य हो गई है।
इस अंतर को पाटने के लिए सरकार ने नदी, तालाब, झरनों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर शुल्क लगाने का फैसला किया है। यह कदम राजस्व बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है। 2026-27 तक राजस्व घाटा अनुदान की राशि शून्य हो जाएगी।
पिछले कुछ वर्षों में यह अनुदान घटकर 7,772 करोड़ रुपये (2021-22) से 4,916 करोड़ रुपये (2024-25) तक आ गया है, और जैसे-जैसे यह कम हो रहा है, सरकार पर राजस्व जुटाने का दबाव बढ़ता जा रहा है।
राजस्व जुटाने वाले विभागों को लक्ष्य प्राप्ति पर जोर देने के लिए भी कहा गया है। हाल ही में मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक में यह पाया गया कि 15 अक्तूबर तक तय लक्ष्य का केवल 45 प्रतिशत ही हासिल हुआ था। जीएसटी, खनन, स्टाम्प और रजिस्ट्रेशन को छोड़ अन्य विभागों का प्रदर्शन सुधार की मांग कर रहा है, और सरकार नीतियों व तकनीक में सुधार के जरिए राजस्व बढ़ाने के प्रयास कर रही है।


