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हरिद्वार: खानपुर विधायक उमेश कुमार के कार्यालय पर फायरिंग मामले में जेल में बंद पूर्व विधायक प्रणव सिंह चैंपियन की जमानत याचिका और उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे में भारतीय दंड संहिता की धारा 109 (हत्या के प्रयास में सहायता) हटाने की मांग को लेकर दायर प्रार्थना पत्र पर आज भी सुनवाई नहीं हो सकी। अब इस मामले पर शुक्रवार को सुनवाई होने की संभावना है।
दरअसल, बुधवार को हरिद्वार के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत में प्रणव सिंह चैंपियन की जमानत याचिका और केस से धारा 109 हटाने की मांग को लेकर प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया था। लेकिन बुधवार को सुनवाई नहीं हो पाई थी। गुरुवार को भी इस मामले पर सुनवाई होनी थी, लेकिन किसी कारणवश जज ने इसे नहीं सुना। अब उम्मीद की जा रही है कि शुक्रवार को अदालत इस याचिका पर विचार कर सकती है।
शुक्रवार को चैंपियन की कोर्ट में रिमांड भी है, इसलिए इसी दौरान उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई होने के आसार हैं। पुलिस ने भी कोर्ट में अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए प्रार्थना पत्र दिया है, जिसमें उन्होंने चैंपियन पर लगी धारा 109 को हटाने की मांग की है। हालांकि, उमेश कुमार पक्ष के वकील पहले ही इस धारा को हटाने का विरोध कर चुके हैं।
उमेश कुमार पक्ष के वकील उत्तम सिंह चौहान ने स्पष्ट रूप से कहा कि पुलिस की इस अपील का कड़ा विरोध किया जाएगा। उनका कहना है कि जिस तरह से फायरिंग की गई, वह एक सुनियोजित अपराध था और इसमें हत्या के प्रयास की मंशा थी। इसलिए मुकदमे में धारा 109 को बनाए रखना जरूरी है। वहीं, पुलिस का कहना है कि घटना की जांच अभी जारी है और धारा 109 हटाने का अनुरोध इसलिए किया गया है क्योंकि जांच के दौरान यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि गोली चलाने का उद्देश्य हत्या करना था या नहीं।
26 जनवरी की शाम को खानपुर विधायक उमेश कुमार के कार्यालय में गोली चलने की घटना सामने आई थी। आरोप है कि प्रणव सिंह चैंपियन अपने समर्थकों के साथ वहां पहुंचे थे और उनके समर्थकों व उमेश कुमार के स्टाफ के बीच विवाद हो गया। यह विवाद बढ़ते-बढ़ते हाथापाई में बदल गया और इसी दौरान फायरिंग भी की गई। घटना के तुरंत बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
फायरिंग की घटना के बाद पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए मामले की तहकीकात की और प्रणव सिंह चैंपियन को देहरादून से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने उन्हें 27 जनवरी को कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इस दौरान उनके खिलाफ हत्या के प्रयास सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया।
अब सभी की निगाहें शुक्रवार को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं। यदि कोर्ट चैंपियन की जमानत याचिका स्वीकार कर लेता है, तो उन्हें जेल से रिहा किया जा सकता है। लेकिन यदि कोर्ट इस याचिका को खारिज करता है, तो उन्हें जेल में ही रहना होगा और मुकदमा आगे बढ़ेगा। दूसरी ओर, यदि पुलिस की ओर से दायर धारा 109 हटाने की मांग को स्वीकार कर लिया जाता है, तो उन पर से हत्या के प्रयास में सहायता करने का आरोप हट सकता है। लेकिन यदि यह मांग खारिज होती है, तो मामला और गंभीर हो जाएगा।
यह मामला न केवल कानूनी बल्कि राजनीतिक रूप से भी काफी महत्वपूर्ण बन चुका है। प्रणव सिंह चैंपियन पहले भी अपने विवादित बयानों और कार्यों के कारण चर्चा में रहे हैं। ऐसे में इस मामले को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी चर्चाएं तेज हैं। वहीं, कानून व्यवस्था और निष्पक्ष जांच को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
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