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उत्तराखंड : चमोली जिले के माणा में आए हिमस्खलन में लापता हुए चार श्रमिकों की तलाश के लिए राहत और बचाव कार्य तेज कर दिया गया है। सेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें इस अभियान में जुटी हुई हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन में अत्याधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है, जिसमें सेना के स्निफर डॉग्स, थर्मल इमेजिंग कैमरा और विक्टिम लोकेशन कैमरा का उपयोग किया जा रहा है। इसके अलावा, ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (GPR) की मदद से भी दबे हुए लोगों की खोज की जा रही है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार इस अभियान की निगरानी कर रहे हैं और उन्होंने आपदा प्रबंधन सचिव से हर पल की अपडेट लेने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बचाव दलों को निर्देश दिया है कि लापता मजदूरों की तलाश के लिए हर संभव प्रयास किए जाएं और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त संसाधन भी लगाए जाएं।
हिमस्खलन के कारण माणा क्षेत्र में 55 मजदूर फंस गए थे, जिनमें से 50 को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। इन मजदूरों में से 23 का उपचार जारी है, जबकि चार की मौत हो चुकी है। दो मजदूरों की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें एम्स ऋषिकेश रेफर किया गया है। तीसरे दिन बचाव अभियान के दौरान चार लापता मजदूरों की तलाश के प्रयास जारी हैं।
शनिवार देर शाम तक बचाव दलों ने सभी आठ कंटेनरों को खोज निकाला, लेकिन इनमें कोई भी मजदूर नहीं मिला। इसके चलते अब तलाशी अभियान को और विस्तार दिया जा रहा है। मलबे में दबे श्रमिकों को निकालने के लिए विशेष उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है।
गंगोत्री धाम और यमुनोत्री धाम में मौसम साफ होने के कारण बचाव अभियान में तेजी आने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, आज पूरे दिन मौसम अनुकूल रहने की संभावना है, जिससे राहत एवं बचाव कार्यों में कोई बाधा नहीं आएगी। बीआरओ (सीमा सड़क संगठन) ने गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर डबरानी तक यातायात बहाल कर दिया है। डबरानी से भैरवघाटी तक नॉन-स्किडिंग चेन वाले वाहनों के लिए आवाजाही सुचारू कर दी गई है। हालांकि, भैरवघाटी से गंगोत्री तक भारी बर्फबारी के कारण मार्ग बाधित है और इसे साफ करने का कार्य जारी है। संभावना जताई जा रही है कि आज शाम तक मार्ग पूरी तरह खुल जाएगा। वहीं, यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी यातायात सुचारू कर दिया गया है। धरासू से बड़कोट तक सड़क अब वाहनों के लिए खुल गई है, जिससे राहत सामग्री और बचाव दलों की आवाजाही में आसानी हो रही है।
हिमस्खलन के बाद तेजी से चलाए जा रहे राहत और बचाव अभियान में अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। थर्मल इमेजिंग कैमरा से गर्मी के स्रोतों को स्कैन कर संभावित जीवित व्यक्तियों का पता लगाया जा रहा है। विक्टिम लोकेशन कैमरा मलबे के नीचे दबे लोगों की पहचान करने में मदद कर रहा है। इसके अलावा, जीपीआर की मदद से बर्फ और मलबे के नीचे की स्थिति को स्कैन किया जा रहा है, जिससे दबे हुए लोगों को तलाशने में सहायता मिल रही है।
स्थानीय प्रशासन, सेना, आईटीबीपी और अन्य बचाव एजेंसियों ने समन्वय बनाकर राहत कार्यों को सुचारू रूप से संचालित किया है। सेना के अस्पतालों में घायलों का इलाज किया जा रहा है। माणा स्थित सेना के अस्पताल से 24 मजदूरों को जोशीमठ लाया गया है, जहां उनका इलाज जारी है।
बचाव अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाए जा रहे हैं। लापता श्रमिकों की खोज में ड्रोन और अन्य उच्च तकनीकी उपकरणों का उपयोग किया जा सकता है। प्रशासन का कहना है कि जब तक सभी लापता श्रमिकों को ढूंढ नहीं लिया जाता, तब तक अभियान जारी रहेगा। मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बचाव कार्यों में कोई ढिलाई नहीं होनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त टीमों को भी तैनात किया जाए।
लापता श्रमिकों के परिवारों में गहरी चिंता है और वे बेसब्री से अपने प्रियजनों के सुरक्षित लौटने की उम्मीद कर रहे हैं। प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता देने का आश्वासन दिया है। स्थानीय निवासियों ने भी बचाव कार्यों में सहयोग किया है और राहत सामग्रियों के प्रबंधन में मदद कर रहे हैं।
चमोली के माणा में आए इस हिमस्खलन ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम को उजागर किया है। प्रशासन और बचाव एजेंसियां अपनी पूरी ताकत झोंककर राहत कार्यों में लगी हुई हैं। अत्याधुनिक तकनीकों की मदद से बचाव अभियान को गति दी जा रही है। मौसम के अनुकूल रहने से अभियान को गति मिलने की संभावना है। सभी की उम्मीदें इस बात पर टिकी हैं कि लापता मजदूरों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकाला जाए। प्रशासन, सेना और बचाव एजेंसियां इस दिशा में हर संभव प्रयास कर रही हैं।
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