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हरिद्वार दौरे पर त्रिवेंद्र सिंह रावत, उत्तर प्रदेश निर्माण निगम घोटाले पर दी प्रतिक्रिया

भारत न्यूज़ लाइव

हरिद्वार: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार के सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत आज हरिद्वार दौरे पर रहे, जहां उन्होंने कई महत्वपूर्ण बैठकों और मुलाकातों का सिलसिला जारी रखा। इस दौरे के दौरान उन्होंने सबसे पहले हरिद्वार के डाम कोठी में पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात की और संगठन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। इसके अलावा, उन्होंने हाल ही में निर्वाचित मंडल अध्यक्षों से भी संवाद किया और पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इस मौके पर उन्होंने कार्यकर्ताओं को एकजुट रहने और सरकार की योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया।

इस दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए त्रिवेंद्र सिंह रावत ने उत्तर प्रदेश निर्माण निगम में हुए भ्रष्टाचार पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम का इतिहास बहुत अच्छा नहीं रहा है और यह संस्था कई बार अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी रही है। उत्तराखंड में भी इसके खिलाफ कई शिकायतें दर्ज हुई थीं, जिनमें से कुछ मामलों की जांच भी हुई थी। उन्होंने कहा कि हाल ही में सामने आए उत्तर प्रदेश निर्माण निगम घोटाले में अब तक 5-6 लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी संस्थाओं पर कड़ी निगरानी रखने की जरूरत है क्योंकि ये राज्य को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचा सकती हैं।

उत्तर प्रदेश निर्माण निगम घोटाले को लेकर जारी जांच की गंभीरता को देखते हुए इस मामले को स्पेशल इन्वेस्टिगेशन सेल (SIC) को सौंप दिया गया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस घोटाले में कुल 130 करोड़ रुपये का गबन हुआ है, जिसमें कई उच्च अधिकारियों की संलिप्तता सामने आई है। बताया जा रहा है कि देहरादून के नेहरू कॉलोनी थाने में इस मामले से जुड़े छह मुकदमे पहले ही दर्ज किए जा चुके हैं और अब इन्हें विस्तृत जांच के लिए SIC को ट्रांसफर कर दिया गया है।

त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर बेहद गंभीर है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और सरकार पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए लगातार काम कर रही है।

भ्रष्टाचार पर सरकार की सख्ती

भ्रष्टाचार के खिलाफ उत्तराखंड सरकार की सख्त नीति का उल्लेख करते हुए त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि राज्य में किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार को सहन नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार के कार्यकाल में भी भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाए गए थे, जिसके चलते कई अनियमितताओं पर लगाम लगाने में सफलता मिली थी। उन्होंने कहा कि सरकारी विभागों में पारदर्शिता लाने और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए कई सुधार किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार भ्रष्टाचार से निपटने के लिए तकनीक का भी सहारा ले रही है। ई-टेंडरिंग, ऑनलाइन भुगतान प्रणाली और अन्य डिजिटल प्रक्रियाओं को अपनाने से अनियमितताओं पर लगाम लगाई जा सकती है।

उत्तर प्रदेश निर्माण निगम घोटाला: क्या है मामला?

उत्तर प्रदेश निर्माण निगम पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप कोई नई बात नहीं हैं। पहले भी इस संस्था पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगते रहे हैं। लेकिन इस बार सामने आए घोटाले में 130 करोड़ रुपये के गबन की बात सामने आई है, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा है।

जानकारी के मुताबिक, इस घोटाले में कई ठेकेदारों और सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत सामने आई है। आरोप है कि निर्माण निगम द्वारा जारी किए गए फंड को फर्जी बिलों के माध्यम से हड़प लिया गया। कई निर्माण कार्यों के लिए धनराशि स्वीकृत तो की गई, लेकिन वास्तविक रूप से कार्य पूरा नहीं किया गया।

भ्रष्टाचार पर राजनीतिक प्रतिक्रिया

इस मामले को लेकर विपक्षी दलों ने भी सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस घोटाले की निष्पक्ष जांच की मांग की है और दोषियों को जल्द से जल्द सजा देने की अपील की है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि यह घोटाला सरकार की नाकामी को उजागर करता है और यह दर्शाता है कि राज्य में भ्रष्टाचार किस हद तक फैला हुआ है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार दोषियों को बचाने का प्रयास कर रही है और इस मामले में निष्पक्ष जांच की जरूरत है।

हालांकि, त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार किसी भी दोषी को बख्शने वाली नहीं है। उन्होंने विपक्ष से आग्रह किया कि वे इस मुद्दे पर राजनीति करने के बजाय जांच एजेंसियों को अपना काम करने दें। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता पारदर्शिता बनाए रखना और जनता का विश्वास जीतना है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

इस घोटाले को लेकर कई विशेषज्ञों ने भी अपनी राय दी है। भ्रष्टाचार निरोधक विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी विभागों में वित्तीय अनियमितताओं को रोकने के लिए कड़े नियमों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देकर और प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी बनाकर भ्रष्टाचार को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

इसके अलावा, जानकारों का कहना है कि उत्तर प्रदेश निर्माण निगम जैसे संस्थानों में समय-समय पर ऑडिट कराना आवश्यक है। अगर पहले ही ऐसे मामलों का पता लगाया जाता, तो शायद इतना बड़ा घोटाला होने से रोका जा सकता था।

जनता की प्रतिक्रिया

इस घोटाले को लेकर जनता के बीच भी काफी आक्रोश देखा जा रहा है। लोग सरकार से यह उम्मीद कर रहे हैं कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कई लोगों ने इस मामले को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की और कहा कि सरकारी धन का इस तरह दुरुपयोग करना बहुत बड़ी चिंता का विषय है।

आगे की राह

अब जब यह मामला स्पेशल इन्वेस्टिगेशन सेल को सौंप दिया गया है, तो उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इस घोटाले में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। सरकार ने आश्वासन दिया है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी और किसी भी दोषी को बचने नहीं दिया जाएगा।

त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जनता से अपील की कि वे धैर्य बनाए रखें और जांच एजेंसियों पर भरोसा रखें। उन्होंने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है और आने वाले समय में इस तरह के घोटालों को रोकने के लिए और भी सख्त कदम उठाए जाएंगे।

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