टिहरी बाँध प्रभावितों के भूमिधरी प्रकरण अब तहसील टिहरी से होंगे सम्पन्न, प्रक्रिया होगी तेज और पारदर्शी l

विक्रम सिंह कठैत ( एडिटर) ,भारत न्यूज़ लाइव
टिहरी l बाँध प्रभावितों और टिहरी शहरी क्षेत्र के विस्थापितों के लिए शासन-प्रशासन द्वारा एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जिलाधिकारी एवं पुनर्वास निदेशक टिहरी गढ़वाल नितिका खंडेलवाल द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुपालन में अब टिहरी बाँध प्रभावित तथा टिहरी शहरी विस्थापितों के भूमिधरी मामलों को सीधे तहसील टिहरी से संपादित किया जाएगा। इस संबंध में उप महाप्रबंधक (पुनर्वास), पुनर्वास निदेशालय नई टिहरी ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनका उद्देश्य विस्थापित परिवारों को भूमिधरी अधिकार उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को और अधिक सुगम, पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है।
उन्होंने बताया कि टिहरी बाँध परियोजना के चलते विस्थापित हुए शहरी पात्र परिवारों को आवंटित भूखण्डों पर भूमिधरी अधिकार देने के लिए अब तक पुनर्वास निदेशालय में आवेदन प्राप्त होते थे, जिनकी जांच के पश्चात सूचियाँ तैयार की जाती थीं। इसके बाद दाखिला-खारिज की कार्रवाई तहसील कार्यालय के माध्यम से पूरी होती थी। लेकिन अब संपूर्ण प्रक्रिया को सरल बनाने के उद्देश्य से भूमिधरी संबंधी सभी कार्यवाही सीधे तहसील टिहरी से संचालित की जाएगी। इससे आवेदकों को कई कार्यालयों के बीच चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और समय की बचत होगी।
पुनर्वास निदेशालय द्वारा जारी दिशानिर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि विस्थापितों को भूमिधरी दिए जाने की प्रक्रिया अब पूरी तरह सुव्यवस्थित रूप से संचालित की जाएगी। इसके लिए चरणबद्ध व्यवस्था निर्धारित की गई है। प्रथम चरण में मूल भूखण्ड आवंटी, उनके उत्तरजीवी या अधिकृत केता द्वारा तहसील टिहरी में आवेदन प्रस्तुत किया जाएगा। इसके साथ आवश्यक दस्तावेज संलग्न करना अनिवार्य होगा, जिसमें आवंटन पत्र की प्रति, कब्जा प्रमाण पत्र की प्रति, भूखण्ड की लागत जमा राशि की रसीद, मूल आवंटी की मृत्यु के मामले में उत्तरजीवी प्रमाण पत्र, भूखण्ड क्रय किए जाने की स्थिति में रजिस्ट्री की प्रति, आधार कार्ड की प्रति और भूखण्ड के दाखिला-खारिज न होने संबंधी शपथ पत्र शामिल हैं। दस्तावेजों की यह सूची विस्थापन एवं पुनर्वास प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
दूसरे चरण में तहसील टिहरी द्वारा प्राप्त आवेदन पत्रों और संलग्न साक्ष्यों को सत्यापन के लिए पुनर्वास निदेशालय नई टिहरी भेजा जाएगा। यहाँ विशेषज्ञ टीम द्वारा सभी दस्तावेजों की जांच की जाएगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि आवेदनकर्ता वास्तविक पात्र विस्थापित ही हों तथा उनके भूखण्ड आवंटन और कब्जा संबंधी तथ्यों में कोई विसंगति न हो। यह सत्यापन प्रक्रिया समूची कार्यवाही की विश्वसनीयता और पारदर्शिता का आधार बनेगी।
तीसरे चरण में पुनर्वास निदेशालय नई टिहरी द्वारा प्राप्त आवेदनों को पृथक डायरी पंजिका में दर्ज किया जाएगा। इसके बाद 7 दिनों के भीतर जांच-सत्यापन पूरा कर दिया जाएगा। निर्धारित समयसीमा इस बात का संकेत है कि विभाग अब पुनर्वास कार्यों को तेजी और दक्षता के साथ पूर्ण करने के लिए प्रतिबद्ध है। सत्यापन के पश्चात सभी आवेदन तहसील टिहरी को वापस भेजे जाएंगे।
चौथे चरण में तहसील टिहरी द्वारा सत्यापित आवेदन पत्रों पर दाखिला-खारिज की प्रक्रिया आरंभ की जाएगी। निर्देशों के अनुसार तहसील कार्यालय को यह सुनिश्चित करना होगा कि पात्र काश्तकारों के नाम दाखिला-खारिज की कार्यवाही यथाशीघ्र पूरी हो। इससे टिहरी बाँध विस्थापन से जुड़े हजारों परिवारों को कानूनी रूप से उनके भूखण्ड का अधिकार प्राप्त करने में राहत मिलेगी।
पाँचवें चरण में यह स्पष्ट किया गया है कि काश्तकारों द्वारा आवेदन प्रस्तुत करने की तिथि से लेकर एक माह के भीतर दाखिला-खारिज की सम्पूर्ण प्रक्रिया पूर्ण कर दी जाएगी। यह समय सीमा उन विस्थापित परिवारों के लिए बड़ी राहत के रूप में सामने आई है, जो वर्षों से भूमिधरी अधिकार के इंतजार में हैं। अब निर्धारित अवधि में उन्हें अपने भूखण्ड का वैधानिक स्वामित्व मिल सकेगा।
पुनर्वास निदेशालय के अधिकारियों ने बताया कि इस नई व्यवस्था से न केवल प्रक्रिया सरल होगी बल्कि विस्थापितों को विभागीय देरी और अनावश्यक औपचारिकताओं से भी राहत मिलेगी। टिहरी बाँध परियोजना के कारण वर्षों पहले विस्थापित हुए परिवार अभी भी कई प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण भूमिधरी से वंचित थे। नए आदेशों से अब उनकी समस्याओं का समाधान तेज गति से संभव हो सकेगा।
इस निर्देश के लागू होने से टिहरी शहरी क्षेत्र के कई विस्थापित परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा, जिन्हें अब तक दाखिला-खारिज के लिए पुनर्वास निदेशालय तथा तहसील कार्यालय के बीच बार-बार चक्कर लगाने पड़ते थे। अब तहसील टिहरी ही एकल संपर्क केंद्र की भूमिका निभाएगा। यह व्यवस्था प्रशासनिक सरलता, समयबद्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
पुनर्वास विभाग के अनुसार यह निर्णय जिलाधिकारी नितिका खंडेलवाल के निर्देशों के अनुरूप लिया गया है, जो विस्थापितों की समस्याओं के समाधान के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं। विभाग का मानना है कि इस नई प्रक्रिया से टिहरी बाँध प्रभावितों के पुनर्वास कार्यों में तेजी आएगी और वर्षों से लंबित भूमिधरी प्रकरण भी शीघ्र निस्तारित होंगे।
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