
विक्रम सिंह कठैत ( एडिटर) ,भारत न्यूज़ लाइव
उत्तराखंड आंदोलन के अग्रणी, अमर सेनानी और संघर्ष की धड़कन रहे फील्डमार्शल दिवाकर भट्ट के निधन की खबर ने पूरे राज्य को शोकाकुल कर दिया है। उनके जाने से न केवल उत्तराखंड की राजनीतिक-सामाजिक धारा में एक बड़ा रिक्त स्थान उत्पन्न हुआ है, बल्कि पूरे आंदोलनकारी समुदाय ने एक ऐसे व्यक्तित्व को खो दिया है, जिसका जन्म सदियों में एक बार होता है।
दिवाकर भट्ट वह नेता थे जिन्होंने अपना पूरा जीवन, परिवार और व्यक्तिगत सुख-सुविधाएँ उत्तराखंड की सेवा और इसके निर्माण के लिए समर्पित कर दीं। उनके लिए उत्तराखंड मात्र एक भूगोल नहीं, बल्कि उनकी आत्मा, पहचान और जीवन-धर्म था। वे उन विरल योद्धाओं में से थे जिन्होंने अपने नहीं, बल्कि अपने लोगों के सपनों को पूरा करने के लिए संघर्ष किया। न स्वार्थ, न पद की इच्छा—सिर्फ जनहित और राज्यहित के लिए उनका समर्पण उन्हें एक अद्वितीय व्यक्तित्व बनाता है।

उनका निधन एक गहरा भावनात्मक आघात है, लेकिन उनका जीवन और उनके आदर्श हमेशा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बने रहेंगे। भट्ट जी ने सिखाया कि संघर्ष कठिन हो सकता है, यात्रा लंबी हो सकती है, पर यदि उद्देश्य जनहित का हो, तो पूरा पहाड़ आपके साथ खड़ा होता है। उनके सिद्धांत, उनकी क्रांतिकारी सोच और उनका अनुशासन प्रदेश के युवाओं को आगे बढ़ने की शक्ति देते रहेंगे।
दिवाकर भट्ट जी के पार्थिव शरीर के दर्शनों और शोक संतप्त परिवार को सांत्वना देने के लिए आज हरिद्वार स्थित ‘तरुण हिमालय’ आवास पर बड़ी संख्या में लोग पहुँचे। उपस्थित लोगों में आईजा के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह कठैत, रमेश डबराल, उपेंद्र प्रधान, भगवती प्रसाद भट्ट, निखिल रौतेला, विकास, सौरभ कठैत, राजपाल मेवाड़, जयंती प्रसाद, अनुज भट्ट, राजेश बडोनी, सौरभ नेगी सहित अनेक गणमान्य लोग शामिल रहे।
प्रदेश भर में दिवाकर भट्ट के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया जा रहा है, और उनकी विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प युवाओं द्वारा दोहराया जा रहा है।
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