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यति शिवानंद गिरि जी बने पंचलेश्वर नाथ महादेव मंदिर के नए महंत ।

नवीन चन्द्र ( चीफ एडिटर, भारत न्यूज़ लाइव )

गंगा दशहरा के पावन अवसर पर प्राचीन एवं ऐतिहासिक पंचलेश्वर नाथ महादेव मंदिर में श्रद्धा, आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी मंदिर परिसर में भव्य मेले का आयोजन किया गया, जिसमें दूर-दराज क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु पहुंचे। श्रद्धालुओं ने गंगा नदी में आस्था की डुबकी लगाकर पूजा-अर्चना की तथा भगवान शिव का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि की कामना की। पूरे क्षेत्र में “हर-हर महादेव” और “बम-बम भोले” के जयघोष गूंजते रहे, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो उठा।

यति शिवानंद गिरि जी बने पंचलेश्वर नाथ महादेव मंदिर के नए महंत ।

गंगा दशहरा के इस पावन अवसर पर पंचलेश्वर नाथ महादेव मंदिर में एक महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन भी संपन्न हुआ। श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर श्री यति नरसिंहानंद गिरि जी महाराज द्वारा यति शिवानंद गिरि जी महाराज को चादर ओढ़ाकर पंचलेश्वर नाथ महादेव मंदिर का महंत नियुक्त किया गया। इस दौरान मंदिर परिसर में मौजूद साधु-संतों और श्रद्धालुओं ने जयघोष के साथ उनका स्वागत किया।

महंत नियुक्ति समारोह में श्री महंत रणसिंहानंद गिरि जी सहित अनेक संत-महात्माओं ने यति शिवानंद गिरि जी महाराज को आशीर्वाद प्रदान किया। कार्यक्रम के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया, जिससे वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक रंग में रंग गया। श्रद्धालुओं ने नव नियुक्त महंत का अभिनंदन करते हुए मंदिर की धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने की कामना की।

पंचलेश्वर नाथ महादेव मंदिर अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक मान्यताओं के कारण अत्यंत प्रसिद्ध है। मान्यता है कि यह मंदिर महाभारत कालीन है तथा इसकी स्थापना पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान की थी। मंदिर में स्थापित शिवलिंग स्वयंभू बताया जाता है, जिसके दर्शन के लिए वर्षभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। गंगा दशहरा जैसे विशेष पर्वों पर यहां श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है।

यति शिवानंद गिरि जी बने पंचलेश्वर नाथ महादेव मंदिर के नए महंत ।

इस मंदिर की सबसे विशेष और अद्भुत बात यह है कि यहां गंगा नदी की धारा लगभग आधा किलोमीटर तक पूर्व से पश्चिम दिशा की ओर बहती है, जिसे स्थानीय लोग “उल्टी गंगा” के नाम से जानते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है और यहां स्नान करने से श्रद्धालुओं के पापों का नाश होता है। इसी आस्था के चलते गंगा दशहरा पर हजारों भक्त यहां पहुंचकर गंगा स्नान करते हैं और भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं।

मेले के दौरान मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भारी भीड़ देखने को मिली। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए स्थानीय प्रशासन द्वारा विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए पुलिस बल भी तैनात रहा, ताकि मेले में किसी प्रकार की अव्यवस्था उत्पन्न न हो। जगह-जगह पेयजल, चिकित्सा और यातायात व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई थी।

मेले में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ स्थानीय दुकानों और खान-पान के स्टालों पर भी लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। बच्चों और युवाओं ने मेले का आनंद लिया, वहीं महिलाओं ने मंदिर में पूजा कर परिवार की सुख-शांति की कामना की। पूरे दिन मंदिर परिसर भक्तों की भीड़ से गुलजार रहा।

गंगा दशहरा के इस पावन अवसर पर आयोजित यह धार्मिक मेला न केवल श्रद्धा और आस्था का प्रतीक बना, बल्कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं की जीवंत झलक भी प्रस्तुत करता नजर आया। श्रद्धालुओं का उत्साह और साधु-संतों का सान्निध्य इस आयोजन को और अधिक दिव्य एवं भव्य बना गया।

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