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रांची: दुमका में चुनावी रैली में उपस्थित गृह मंत्री अमित शाह ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सीधा जवाब मांगते हुए उन्हें ट्वीट करने की सलाह दी। शाह ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि संथाल की इस पवित्र भूमि के कारण ही झारखंड राज्य का अस्तित्व संभव हो सका है। उन्होंने लोगों को याद दिलाते हुए कहा कि जब आपकी आवाज़ें झारखंड के लिए संघर्ष कर रही थीं, तब उन पर गोलियां और लाठियां बरसाई गईं। यह सब उस समय की कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुआ था।
अमित शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने झारखंड को वह अधिकार नहीं दिया, जिसकी यह पात्रता रखता था, और आज सीएम हेमंत सोरेन उसी कांग्रेस के समर्थन में आकर बैठे हैं। उन्होंने कहा कि सोरेन भूल चुके हैं कि सैकड़ों युवाओं ने इस लड़ाई में बलिदान दिया, लाठियां खाईं, लेकिन वह सिर्फ मुख्यमंत्री बनने के लिए कांग्रेस और राजद के समर्थन में चले गए। शाह ने यह भी कहा कि झारखंड बनाने का कार्य पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने किया था और उसे संवारने का कार्य वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर रहे हैं।
गृह मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 15 नवंबर को आदिवासी गौरव दिवस मनाने की पहल का जिक्र किया और बताया कि एक कमेटी का गठन किया जा रहा है, जो इस पूरे वर्ष को आदिवासी गौरव दिवस के रूप में मनाएगी। शाह ने यह भी कहा कि आजादी के 75 वर्षों में किसी प्रधानमंत्री ने धरती आबा के गांव नहीं जाने की हिम्मत नहीं दिखाई, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने यह किया। उन्होंने कहा कि मोदी ने 75 वर्षों के बाद पहली बार गरीब आदिवासी की बेटी द्रौपदी जी को महामहिम पद पर आसीन किया है।
शाह ने प्रधानमंत्री मोदी की योजनाओं का जिक्र करते हुए बताया कि उन्होंने 200 करोड़ रुपये की लागत से 10 आदिवासी म्यूजियम बनाए जाने की मंजूरी दी है, जो आदिवासियों को सम्मान प्रदान करेंगे। इनमें सिदो कान्हो की प्रतिमा भी स्थापित की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि हेमंत सोरेन में हिम्मत है तो उन्हें उस समय की यूपीए सरकार का जवाब देना चाहिए, जब उनके समर्थन में आदिवासियों के लिए केवल 28,000 करोड़ का बजट आवंटित किया गया था, जिसे नरेंद्र मोदी की सरकार ने बढ़ाकर 1 लाख 33 हजार करोड़ किया।
अमित शाह ने आगे कहा कि हेमंत सोरेन यदि हमसे हिसाब मांग रहे हैं, तो हमने धरती आबा की स्मृति में किए गए कार्यों का हिसाब दे दिया है। उन्होंने सोरेन से यह भी पूछा कि आखिर यूपीए सरकार का हिसाब आम आदिवासी भाइयों और बहनों को क्यों नहीं दिया जा रहा है। अमित शाह ने गंभीरता से यह आरोप लगाया कि सोरेन ने वोट बैंक की राजनीति के लिए घुसपैठियों को अपने राज्य में प्रवेश कराया, जिससे आदिवासियों की भूमि और जनसंख्या दोनों खतरे में पड़ गए हैं।
उन्होंने कहा कि आदिवासियों की जनसंख्या में कमी के लिए सोरेन स्वयं जिम्मेदार हैं। अमित शाह के बयान यह दर्शाते हैं कि चुनावी रैलियां न केवल राजनीतिक पटल पर महत्वपूर्ण होती हैं, बल्कि ये सत्ताधारी और विपक्षी दलों के बीच की प्रतिस्पर्धा और एक-दूसरे की नीतियों और उपलब्धियों पर सवाल उठाने का माध्यम भी बनती हैं। ऐसे में, आगामी चुनावों में इन मुद्दों का और अधिक गहराई से विश्लेषण किया जाएगा।
सार्वजनिक मंच पर अपनी समस्याओं और उनके समाधान के लिए आवाज उठाना आम लोगों के लिए प्रेरणादायक हो सकता है। अमित शाह का यह भाषण न केवल झारखंड के विकास की कहानी है, बल्कि यह एक राजनीतिक संदेश भी है, जिसका असर आगामी चुनावों पर पड़ सकता है।


