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Longest Night : शीतकालीन संक्रांति का खगोलीय और सांस्कृतिक महत्व

भारत न्यूज़ लाइव
21 दिसंबर को उत्तरी गोलार्ध में शीतकालीन संक्रांति होगी, जो साल की सबसे छोटी दिन और Longest Night का प्रतीक है। यह खगोलीय घटना पृथ्वी के झुकाव और सूर्य की परिक्रमा के कारण होती है। इस दिन सूर्य मकर रेखा के ठीक ऊपर होता है, और उत्तरी गोलार्ध सूर्य से सबसे दूर झुका रहता है।
मुख्य बातें:
- खगोलीय घटना: पृथ्वी के 23.5° के झुकाव के कारण यह दिन सबसे कम रोशनी और सबसे लंबी रात का होता है।
- सूरज की वापसी: इस दिन के बाद दिन लंबे होने लगते हैं।
- ध्रुवीय रात: आर्कटिक सर्कल में इस दिन सूर्य नहीं उगता।
- समारोह और परंपराएं:
- स्टोनहेंज (इंग्लैंड): सूर्य की किरणों के साथ जुड़ी परंपरा।
- सोयाल समारोह (होपी जनजाति, अमेरिका): नृत्य और शुद्धिकरण की रस्म।
- डोंग झी (चीन): परिवार और पारंपरिक भोजन के साथ त्योहार।
- सेंट लूसिया डे (स्कैंडिनेविया): प्रकाश के उत्सव का प्रतीक।
संदेश:
शीतकालीन संक्रांति अंधकार के बीच आशा और प्रकाश की वापसी का प्रतीक है। यह न केवल खगोलीय घटना है, बल्कि आत्ममंथन और प्राकृतिक चक्रों से जुड़ने का भी समय है।
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