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उत्तराखंड में स्मार्ट मीटर स्थापना पर रोक, उपभोक्ताओं की बढ़ती शिकायतों के बाद बड़ा फैसला l

विक्रम सिंह कठैत ( एडिटर) ,भारत न्यूज़ लाइव

उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPCL) ने राज्यभर में स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह निर्णय उस समय लिया गया जब स्मार्ट मीटरों को लेकर उपभोक्ताओं की शिकायतों का सिलसिला लगातार बढ़ता जा रहा था। कई उपभोक्ताओं ने बिल में अनियमितता, तेज रीडिंग, अचानक बढ़े हुए बिजली बिल तथा तकनीकी दिक्कतों जैसी समस्याएं सामने रखी थीं। इन शिकायतों का दबाव इतना बढ़ गया कि कंपनी को समीक्षा होने तक स्मार्ट मीटर स्थापना प्रक्रिया को रोकना पड़ा।

सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों से कई जिलों में स्मार्ट मीटरों से जुड़े विवाद लगातार सामने आ रहे थे। उपभोक्ताओं का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगते ही उनकी बिजली खपत अचानक बढ़ गई, जबकि उनके उपयोग में पहले जैसा ही लोड बना हुआ था। कई जगहों पर बिल कई गुना बढ़ जाने से उपभोक्ता नाराज़ हैं। कई उपभोक्ता कार्यालयों में बार-बार शिकायत लेकर पहुंच रहे थे, वहीं सोशल मीडिया पर भी स्मार्ट मीटरों के खिलाफ व्यापक नाराज़गी देखने को मिली। इन परिस्थितियों को देखते हुए यूपीसीएल प्रबंधन ने स्मार्ट मीटरों की नई स्थापना को रोकते हुए पहले मौजूदा सिस्टम की तकनीकी जांच और शिकायतों के समाधान पर ध्यान देने का निर्णय लिया है।

यूपीसीएल अधिकारियों का कहना है कि उपभोक्ताओं का भरोसा सर्वोपरि है। यदि किसी तकनीकी गड़बड़ी या रीडिंग त्रुटि के कारण उपभोक्ताओं को परेशानी हो रही है, तो इसे तुरंत ठीक करना कंपनी की जिम्मेदारी है। इसके लिए एक समिति भी बनाई जा रही है, जो स्मार्ट मीटरों की सटीकता, इंस्टॉलेशन प्रोसेस और बिलिंग सिस्टम की गहन जांच करेगी। साथ ही, शिकायतों की वास्तविक स्थिति, मीटरों की कार्यप्रणाली व डेटा ट्रांसमिशन सिस्टम का भी परीक्षण किया जाएगा।

उधर, ऊर्जा विभाग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि स्मार्ट मीटर आधुनिक तकनीक पर आधारित होते हैं और सही तरीके से इंस्टॉल व कॉन्फ़िगर किए जाने पर त्रुटियों की संभावना बेहद कम होती है। लेकिन यदि इंस्टॉलेशन में कमी रह जाए या मीटर का डेटा सर्वर से ठीक से सिंक न हो तो बिलिंग संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसलिए सिस्टम की पूर्ण जांच आवश्यक है।

राज्य सरकार ने भी इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए यूपीसीएल से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जब तक उपभोक्ता शिकायतों का संतोषजनक समाधान नहीं निकलता, तब तक स्मार्ट मीटर लगाने पर रोक जारी रहेगी। राज्य के कई हिस्सों में ग्राउंड लेवल पर उपभोक्ताओं की प्रतिक्रिया लेने का भी निर्देश दिया गया है।

स्मार्ट मीटरों का उद्देश्य बिजली खपत की लाइव मॉनिटरिंग, पारदर्शिता, चोरी रोकने और बिलिंग में सुधार लाना था, लेकिन शिकायतें बढ़ने के बाद सरकार व विभाग दोनों ही सतर्क हो गए हैं। अब देखना यह होगा कि जांच पूरी होने के बाद क्या स्मार्ट मीटरिंग की प्रक्रिया दोबारा शुरू होती है या इसमें व्यापक बदलाव किए जाते हैं।

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