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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट की नौ-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने मंगलवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 39(बी) के तहत सरकार हर निजी संपत्ति का अधिग्रहण केवल “सामान्य भलाई” के नाम पर नहीं कर सकती। भारत के मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में इस बहुमत के फैसले ने न्यायमूर्ति वी.आर. कृष्ण अय्यर के पहले के एक महत्वपूर्ण फैसले को पलटते हुए स्पष्ट किया कि सभी निजी स्वामित्व वाले संसाधन राज्य के अधीन नहीं लाए जा सकते।
अदालत ने व्याख्या की कि केवल उन्हीं संपत्तियों को अनुच्छेद 39(बी) के “भौतिक संसाधन” की श्रेणी में रखा जा सकता है जिनकी “भौतिक प्रकृति” और उनके “समुदाय पर प्रभाव” की जांच की जाए। इस प्रकार के फैसले ने राज्य के पास अधिग्रहण की शक्ति को सीमित कर दिया है, ताकि आम नागरिक की निजी संपत्ति पर केवल सीमित और आवश्यक स्थितियों में ही राज्य दावा कर सके। इसके साथ ही, न्यायालय ने यह भी माना कि इस अनुच्छेद के तहत पारित ऐसे किसी भी कानून को अनुच्छेद 31(सी) के तहत संवैधानिक सुरक्षा प्राप्त होगी।
हालांकि, इस फैसले पर न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना ने आंशिक असहमति व्यक्त की, जबकि न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया ने अपने सभी पहलुओं पर असहमति जताई।


