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आज, 14 मार्च 2025 को पूरे भारत में होली का त्योहार धूमधाम से मनाया गया। सुबह से शाम तक लोग रंगों में डूबे नजर आए। गुलाल, अबीर और पानी के रंगों ने हर गली-मोहल्ले को रंगीन बना दिया। बच्चों ने पिचकारियों से मस्ती की, तो बड़ों ने संगीत की धुनों पर नृत्य कर इस पर्व का आनंद उठाया। मिठाइयों का आदान-प्रदान और हंसी-ठिठोली ने माहौल को और जीवंत बनाया। होली का यह उत्सव आपसी प्रेम और भाईचारे का प्रतीक है, जो लोगों को एकता के सूत्र में बांधता है। देश के हर कोने से ऐसी तस्वीरें सामने आईं, जहां लोग रोजमर्रा की चिंताओं को भूलकर रंगों के इस त्योहार में डूब गए।
हालांकि, उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में होली का उत्सव एक दिन बाद, यानी 15 मार्च 2025 को मनाया जाएगा। यहां की पर्वतीय परंपराओं में होली का अपना अनूठा स्वरूप है, जिसमें लोक गीत और नृत्य विशेष महत्व रखते हैं। इस खास अवसर को ध्यान में रखते हुए, धामी सरकार ने शनिवार को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। इसके आदेश जारी कर दिए गए हैं, ताकि लोग अपनी सांस्कृतिक विरासत को पूरे उत्साह से मना सकें। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सुबह सभी को होली की शुभकामनाएं दीं और पर्यावरण संरक्षण के साथ स्वच्छता का संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने प्राकृतिक रंगों के प्रयोग पर जोर दिया, ताकि पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे।
उत्तराखंड सरकार ने इस मौके पर बड़ा फैसला लिया है। सीएम धामी के निर्देश पर, 15 मार्च को सभी शासकीय, अशासकीय कार्यालयों, शिक्षण संस्थानों और विद्यालयों में अवकाश रहेगा।

हालांकि, बैंक, कोषागार और उप-कोषागार इससे मुक्त रहेंगे। यह निर्णय पर्वतीय संस्कृति के सम्मान और जनभावनाओं को ध्यान में रखकर लिया गया है। इससे पहाड़ी क्षेत्रों के लोग पारंपरिक होली को हर्षोल्लास से मना सकेंगे। कुमाऊं में बैठकी और खड़ी होली, तो गढ़वाल में ढोल-नगाड़ों के साथ नृत्य इस पर्व का मुख्य आकर्षण होगा। सरकार का यह कदम न केवल स्थानीय परंपराओं को बढ़ावा देगा, बल्कि पर्यटन को भी प्रोत्साहन दे सकता है, क्योंकि उत्तराखंड की होली देश-विदेश के लोगों को आकर्षित करती है।
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