प्रयागराज महाकुंभ में मौनी अमावस्या स्नान के दौरान भगदड़, कई श्रद्धालु घायल, 10-12 के मारे जाने की आशंका

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प्रयागराज l महाकुंभ में मौनी अमावस्या के दिन स्नान के लिए लाखों श्रद्धालु संगम तट पर जुटे थे। इस दौरान संगम नोज पर अचानक भगदड़ मच गई, जिससे कई श्रद्धालु गंभीर रूप से घायल हो गए और लगभग 10-12 लोगों के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है। प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए घायलों को नजदीकी स्वरूपरानी अस्पताल में भर्ती कराया है। यह घटना मंगलवार-बुधवार की रात करीब 1.30 बजे घटी, जब शाही स्नान के लिए लाखों की भीड़ संगम तट पर उमड़ पड़ी थी। अफवाहों के चलते श्रद्धालुओं में हड़कंप मच गया और देखते ही देखते भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई। अफरातफरी में महिला-पुरुष समेत कई श्रद्धालु जमीन पर गिर पड़े और अनियंत्रित भीड़ द्वारा कुचले जाने से हालात और गंभीर हो गए।
घटनास्थल पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की और घायलों को तत्काल एंबुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाया गया। मेलाधिकारी विजय किरन आनंद ने बताया कि भगदड़ फैलने का कारण अफवाह थी, जिससे श्रद्धालुओं के बीच घबराहट बढ़ गई। प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि 50 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिनमें से कुछ की हालत गंभीर बनी हुई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं हालात पर नजर बनाए हुए हैं और उन्होंने स्थिति की जानकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी दी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घटना पर चिंता व्यक्त की और चौथी बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बात कर राहत और बचाव कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। बुधवार तक कुल 3 करोड़ 61 लाख श्रद्धालु संगम में स्नान कर चुके थे, जबकि मंगलवार तक यह संख्या 19 करोड़ 94 लाख तक पहुंच चुकी थी। इतनी विशाल संख्या में लोगों के आगमन से संगम क्षेत्र में भारी भीड़भाड़ हो गई, जिससे प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि अखाड़ों के संत अमृत स्नान करने का निर्णय लेंगे, लेकिन प्रशासन को पहले सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने होंगे। उन्होंने कहा कि त्रिवेणी तट पर स्नान का क्रम पहले जैसा ही रहेगा, लेकिन श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संत समाज ने सुबह अमृत स्नान न करने का फैसला किया था। हालांकि, यदि प्रशासन बेहतर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करता है और समय निर्धारित करता है, तो सभी अखाड़े अपने निर्धारित क्रम के अनुसार अमृत स्नान के लिए जाएंगे।
इस बीच, पुलिस प्रशासन ने अखाड़ा मार्ग खाली कराने के लिए अनाउंसमेंट किए और श्रद्धालुओं से संयम बनाए रखने की अपील की। सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षाबलों को तैनात किया गया है, ताकि दोबारा ऐसी कोई घटना न हो। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन संगम तट पर भीड़ का दबाव अब भी बरकरार है। उन्होंने बताया कि आज महाकुंभ में लगभग 8-10 करोड़ श्रद्धालु मौजूद हैं, जबकि बीते दिन यानी मंगलवार को लगभग 5.5 करोड़ लोगों ने संगम में स्नान किया था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि संगम नोज पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जमा होने से दबाव बढ़ गया था। उन्होंने बताया कि रात 1 से 2 बजे के बीच कुछ श्रद्धालु बैरिकेड्स को पार करने की कोशिश कर रहे थे, जिससे भगदड़ मची और कुछ लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रशासन श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है। उन्होंने संतों से भी चर्चा की और उन्हें बताया कि पहले श्रद्धालुओं को स्नान करने दिया जाएगा और फिर अखाड़े संगम तट पर जाकर स्नान करेंगे। संत समाज भी इस निर्णय से सहमत हो गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बातचीत कर हालात की जानकारी ली। इसके अलावा, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं से संयम बनाए रखने की अपील की और कहा कि अफवाहों पर ध्यान न दें। उन्होंने कहा कि सरकार पूरी तरह से तत्पर है और सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि श्रद्धालु सिर्फ संगम नोज पर स्नान करने की बजाय 15-20 किलोमीटर के दायरे में बनाए गए अस्थायी घाटों पर भी स्नान करें, ताकि भीड़ का दबाव कम हो सके।
इस घटना के बाद प्रशासन ने स्नान घाटों पर सुरक्षा के अतिरिक्त इंतजाम करने शुरू कर दिए हैं। पूरे क्षेत्र में पुलिस और प्रशासन अलर्ट पर है। अफवाहों को रोकने के लिए व्यापक स्तर पर अनाउंसमेंट किए जा रहे हैं और सोशल मीडिया के जरिए भी श्रद्धालुओं को सही जानकारी दी जा रही है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अनुरोध किया है कि वे संयम बनाए रखें और किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न दें।
इस घटना के बाद कई सवाल उठ रहे हैं कि क्या प्रशासन इस विशाल आयोजन के लिए पूरी तरह तैयार था या नहीं। इतनी भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए क्या पर्याप्त इंतजाम किए गए थे? इसके अलावा, क्या श्रद्धालुओं को संगम नोज तक जाने की अनुमति देने के बजाय अन्य घाटों की ओर निर्देशित किया जा सकता था? ये सभी प्रश्न अब प्रशासन और सरकार के सामने चुनौती के रूप में खड़े हैं।
महाकुंभ में भगदड़ की घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं। साल 2013 में इलाहाबाद रेलवे स्टेशन पर कुंभ के दौरान मची भगदड़ में 36 लोगों की मौत हो गई थी। इसी तरह, 1954 में कुंभ मेले के दौरान हुई भगदड़ में 800 से अधिक लोग मारे गए थे। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या प्रशासन ने पूर्व की घटनाओं से कोई सबक लिया है या नहीं।
फिलहाल, प्रशासन की प्राथमिकता घायलों का इलाज और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हर श्रद्धालु की सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी है और इसके लिए प्रशासन हरसंभव प्रयास कर रहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे लगातार हालात पर नजर बनाए रखें और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सतर्क रहें।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद महाकुंभ में सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा करने की जरूरत महसूस की जा रही है। प्रशासन ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई कदम उठाए हैं, जिसमें संगम क्षेत्र में निगरानी बढ़ाना, अतिरिक्त सुरक्षाबल तैनात करना और श्रद्धालुओं को अन्य स्नान घाटों की ओर निर्देशित करना शामिल है।
श्रद्धालुओं से भी अपील की जा रही है कि वे धैर्य बनाए रखें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। प्रशासन की ओर से कहा गया है कि कुंभ मेले में आने वाले श्रद्धालु किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और सुरक्षित तरीके से स्नान करें।
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