एनआईए ने कश्मीर में आतंकवाद विरोधी छापेमारी तेज की: श्रमिकों की हत्या मामले में जांच जारी

श्रीनगर: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने बुधवार को कश्मीर के विभिन्न इलाकों में छापेमारी करते हुए आतंकवाद से संबंधित एक साजिश की जांच को तेज कर दिया है। अधिकारियों के अनुसार, श्रीनगर, सोपोर और बडगाम में कई स्थानों पर तलाशी ली जा रही है। इन छापों का संबंध 7 फरवरी, 2024 को श्रीनगर के शल्ला कदल इलाके में हुई एक जघन्य घटना से है, जिसमें दो गैर-स्थानीय श्रमिकों की हत्या कर दी गई थी।
इस हत्याकांड में मारे गए श्रमिकों की पहचान पंजाब के अमृतपाल सिंह और रोहित मसीह के रूप में हुई थी। जांच में पाया गया कि इन हत्याओं को लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के सहयोगी संगठन, ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (टीआरएफ) के आतंकवादियों ने अंजाम दिया। अमृतपाल सिंह की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि रोहित मसीह ने अगले दिन दम तोड़ दिया।
इस मामले में एनआईए ने अगस्त 2024 में चार आतंकवादियों के खिलाफ जम्मू की अदालत में आरोप पत्र दायर किया। इन आरोपियों में लश्कर-ए-तैयबा के पाकिस्तान स्थित हैंडलर सहित संगठन के प्रमुख सदस्य शामिल हैं। आरोप पत्र के अनुसार, आदिल मंजूर लंगू नामक आतंकवादी ने इस हत्याकांड को अंजाम दिया।
एनआईए की जांच में आदिल मंजूर लंगू के अलावा, अहरान रसूल डार उर्फ तोता और दाऊद को भी नामजद किया गया है। इनके साथ ही पाकिस्तान स्थित हैंडलर जहांगीर उर्फ पीर साहब का नाम भी शामिल है। अधिकारियों का मानना है कि इन आतंकवादियों ने सुनियोजित ढंग से इन हत्याओं को अंजाम दिया और क्षेत्र में डर का माहौल बनाने का प्रयास किया।
सूत्रों के मुताबिक, बुधवार को सोपोर के दो स्थानों पर छापेमारी की गई, जिनमें एक व्यवसायी परिवार भी शामिल है। एनआईए की यह कार्रवाई आतंकवादी नेटवर्क को ध्वस्त करने और क्षेत्र में उनकी नापाक योजनाओं को विफल करने के उद्देश्य से की जा रही है। इस दौरान, एजेंसी ने संदिग्ध व्यक्तियों और संगठनों की भूमिका का पता लगाने के लिए कई सबूत जुटाए हैं।
पिछले कुछ महीनों में एनआईए ने आतंकवादी गतिविधियों पर नकेल कसने के लिए अपनी जांच तेज कर दी है। खासकर, उन मामलों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिनमें आतंकवादियों को स्थानीय सहयोगियों से मदद मिली है। यह कदम कश्मीर घाटी में आतंकवाद के खात्मे के लिए एक व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
गौरतलब है कि एनआईए द्वारा दायर आरोप पत्र में यह भी बताया गया है कि पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों के हैंडलर कश्मीर में सक्रिय आतंकवादियों को वित्तीय और लॉजिस्टिक सहायता प्रदान कर रहे हैं। इन हैंडलरों का मकसद क्षेत्र में अस्थिरता पैदा करना और निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाना है।
एनआईए की इस कार्रवाई के जरिए न केवल आतंकवादी नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा रहा है, बल्कि उनके सहयोगियों और फंडिंग के स्रोतों का भी पता लगाया जा रहा है। अधिकारी यह सुनिश्चित करने में जुटे हैं कि आतंकवादियों और उनके समर्थकों के खिलाफ ठोस सबूत जुटाए जाएं, ताकि उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि एनआईए की इस तरह की जांच और छापेमारी आतंकवादी संगठनों को कमजोर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। हालांकि, यह भी जरूरी है कि स्थानीय समुदायों का विश्वास जीतने के लिए उनके साथ संवाद और सहयोग को बढ़ावा दिया जाए।
कुल मिलाकर, एनआईए की इस ताजा कार्रवाई का उद्देश्य कश्मीर घाटी में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करना है। एजेंसी आतंकवादियों के खिलाफ कठोर कदम उठाने के साथ-साथ उनके नेटवर्क को ध्वस्त करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। इस प्रक्रिया में स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां भी एनआईए का सहयोग कर रही हैं।
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