
नवीन चन्द्र कुरील ( चीफ एडिटर, भारत न्यूज़ लाइव )
देहरादून l उत्तराखण्ड सरकार ने मनरेगा से जुड़े लाखों श्रमिकों को बड़ी राहत देते हुए महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब राज्य के मनरेगा वर्करों को उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में पंजीकरण के लिए लेबर ऑफिस या श्रमिक सुविधा केन्द्रों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सरकार ने ब्लॉक स्तर पर पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू कर देते हुए सभी खण्ड विकास अधिकारियों (BDO) को इसके लिए आवश्यक Login ID उपलब्ध करा दी है।
सरकार के इस फैसले से प्रदेश के लगभग नौ लाख चालीस हजार मनरेगा कामगारों को सीधे लाभ मिलेगा। पहले श्रमिकों को पंजीकरण कराने के लिए जिले में स्थापित 2–3 श्रमिक सुविधा केन्द्रों तक पहुंचना पड़ता था, जहाँ हमेशा भारी भीड़ रहती थी। भीड़ और अव्यवस्था के कारण हजारों मजदूर समय पर अपना पंजीयन नहीं करा पाते थे, जिसके कारण उनका श्रमिक कार्ड भी नहीं बन पाता था। श्रमिक कार्ड न होने से उन्हें कई सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पाता था।
अब मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर यह पूरी प्रक्रिया सरल और सुगम बन गई है। आदेश के अनुसार, मनरेगा वर्करों का पंजीकरण अब उनके निकटतम विकास खण्ड में ही किया जाएगा। इससे मजदूरों को न तो लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी और न ही घंटों लाइन में लगना पड़ेगा।
सरकारी निर्देशों के तहत सभी ग्राम विकास अधिकारियों (VDO) को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे अपने-अपने क्षेत्र में मनरेगा कामगारों का पंजीकरण सुनिश्चित करें। इसके लिए विभाग द्वारा विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है ताकि पंजीकरण प्रक्रिया ब्लॉक स्तर पर व्यवस्थित तरीके से संचालित हो सके।
बताया गया है कि पंजीकरण प्रक्रिया कल से ही सभी विकास खण्डों में शुरू हो जाएगी। श्रमिक अपने जरूरी दस्तावेज लेकर संबंधित ब्लॉक कार्यालय में जाकर स्वयं पंजीकरण करा सकते हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस व्यवस्था से न केवल समय और पैसे की बचत होगी, बल्कि मजदूरों को उनकी सुविधा के अनुसार पूरी प्रक्रिया पूरी करने में काफी आसानी मिलेगी।
भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार कल्याण संघ, उत्तराखण्ड ने मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के इस निर्णय का स्वागत किया है। संघ का कहना है कि राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई यह पहल श्रमिकों के हित में एक ऐतिहासिक कदम है, जिससे लाखों परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा। संगठन ने कहा कि सरकार का यह कदम श्रमिकों की समस्याओं को गंभीरता से समझने और उन्हें समाधान देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
इस व्यवस्था के लागू होने से मनरेगा श्रमिकों को विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं—जैसे चिकित्सा सहायता, दुर्घटना सहायता, स्कॉलरशिप, गर्भावस्था लाभ आदि—का लाभ जल्दी और सरलता से मिल सकेगा। श्रम विभाग का मानना है कि ब्लॉक स्तर पर पंजीकरण होने से मनरेगा श्रमिकों की वास्तविक संख्या का सही आकलन भी किया जा सकेगा, जिससे योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में मदद मिलेगी।
कुल मिलाकर, यह निर्णय राज्य के मनरेगा वर्करों के लिए बेहद राहतपूर्ण साबित होगा। अब श्रमिकों को अपने ही विकास खण्ड में सुविधाएँ मिलने से उनके समय, पैसे और श्रम—तीनों की बचत होगी और वे समय पर सरकारी लाभ प्राप्त कर सकेंगे।
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