
नवीन चन्द्र कुरील ( चीफ एडिटर, भारत न्यूज़ लाइव )
देहरादून l ट्रेड यूनियन को-ऑर्डिनेशन सेंटर (टीयूसीसी) भारत सरकार द्वारा चार श्रम संहिताओं — वेतन संहिता (2019), औद्योगिक संबंध संहिता (2020), सामाजिक सुरक्षा संहिता (2020) और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यस्थितियाँ संहिता (2020) — को 21 नवम्बर 2025 से लागू करने के ऐतिहासिक निर्णय का हार्दिक स्वागत करता है। ये नई श्रम संहिताएँ न सिर्फ सरलीकरण का प्रतीक हैं, बल्कि श्रम व्यवस्था को आधुनिक और समयानुकूल बनाते हुए आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
नई श्रम संहिताएँ श्रमिक कल्याण का विस्तृत दायरा निर्धारित करती हैं — न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा, सुरक्षित कार्य-परिस्थितियाँ और नियोक्ताओं की जवाबदेही सुनिश्चित करती हैं ताकि किसी भी क्षेत्र के मज़दूरों को आवश्यक सुरक्षा, सुविधा और अधिभार से बचाव मिल सके। विभिन्न क्षेत्रों के असंगठित, गिग व प्लेटफॉर्म कर्मियों, अनुबंधित श्रमिकों, महिलाओं, युवाओं, छोटे एवं मध्यम आयवर्ग के श्रमिकों, बीड़ी और निर्माण क्षेत्र के कर्मियों, वस्त्र उद्योग कर्मियों तथा अन्य जोखिमपूर्ण क्षेत्रों में कार्यरत श्रमिकों को नई संहिताओं से बेहतर सुरक्षा व अधिकार मिलेंगे।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के अंतर्गत श्रमिक इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय पोर्टेबिलिटी का लाभ उठा सकेंगे। श्रमिक अपनी सुविधा के अनुसार देश में कहीं से भी खाद्यान्न प्राप्त कर सकेंगे। विवाद-निपटान प्रणाली अधिक पारदर्शी बनेगी, जिससे ओवरटाइम भुगतान, न्यूनतम वेतन और न्यायसंगत पारिश्रमिक सुनिश्चित करने में बड़ा सुधार होगा।
टीयूसीसी स्पष्ट करता है कि यदि संहिताओं के कार्यान्वयन में कोई कमी पाई जाती है, तो वह सरकार के साथ रचनात्मक संवाद बनाए रखेगा और आवश्यक संशोधन हेतु सरकार को सुझाव देगा। प्रस्तुत प्रस्तावों में श्रमिक हित सर्वोपरि होने चाहिए, और टीयूसीसी इस दिशा में निरंतर कार्य करता रहेगा।
श्रम संहिताओं का क्रियान्वयन भारत के श्रमिकों के लिए सुरक्षित वातावरण बनाने, उद्योगों में विश्वास बढ़ाने और घरेलू व विदेशी निवेश में वृद्धि हेतु उत्प्रेरित करेगा। टीयूसीसी के अनुसार यह कदम भारत को वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में आगे बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगा।
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