
नवीन चंद्र कुरील (चीफ एडिटर,भारत न्यूज लाइव)
हरिद्वार । हालांकि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेन्द्र डोभाल के नेतृत्व में बड़े से बड़े हत्या काण्ड लूट कांड की मिस्ट्री सुलझा दी है। चाहे वाह बाबा हत्या कांड हो या बैंक लूट काण्ड पुलिस ने अपराधियों को पकड़ कर सलाखों के पीछे पहुंचाया है । लेकिन ऐसे माफिया जो राजनीति एवं ब्यूरोक्रेसी की आड़ में पनप रहे हैं । और अपना जाल फैलाए हुए हैं पुलिस की पकड़ से बाहर है। इन माफिया समूहों का उद्देश्य आम तौर पर अवैध तरीके से पैसे कमाना और शक्ति हासिल करना होता है। इनके संगठन का ढाँचा भले अलग-अलग हो, पर सभी एक ही तरह के अनुशासन एवं गोपनीयता का पालन करते हैं। माफियों का वर्गीकरण उनके कार्यक्षेत्र, संगठन, और गतिविधियों के आधार पर किया जा सकता है। यहाँ कुछ प्रमुख प्रकार के माफिया हैं। इस प्रकार के सभी माफिया भारत में भी विद्यमान है ।
इतालवी माफिया – इसमें सिसिलियन माफिया, कालाब्रियन,नेपोली का कैमोर्रा शामिल हैं। ये मुख्य रूप से इटली में सक्रिय हैं और ड्रग तस्करी, धन उगाही, और वैध व्यवसायों में भी निवेश करते हैं। यह भारत के राज्यों में भी है ।रूसी माफिया – रूस और पूर्व सोवियत संघ के देशों में सक्रिय, ये संगठित गिरोह अंतरराष्ट्रीय अपराधों जैसे कि मनी लॉन्ड्रिंग, साइबर अपराध, और ड्रग तस्करी में शामिल होते हैं।
जापानी याकूजा – जापान में सक्रिय, ये माफिया संगठन पारंपरिक ढंग से संगठित होते हैं और जुए, नशीली दवाओं का व्यापार, और अवैध व्यवसायों में निवेश करते हैं।
चीनी ट्रायड – ये चीन और हांगकांग में सक्रिय माफिया समूह होते हैं, जो ड्रग्स, मानव तस्करी, और अवैध जुआ में शामिल होते हैं।
लातिनी माफिया – मेक्सिको और दक्षिण अमेरिकी देशों में सक्रिय कार्टेल और गिरोह, जो मुख्य रूप से ड्रग तस्करी, अपहरण, और हत्याओं में शामिल होते हैं। जैसे कि मेक्सिकन ड्रग कार्टेल, कोलंबियाई कार्टेल।
भारतीय माफिया – भारत में सक्रिय माफिया समूह मुख्य रूप से अवैध वसूली, नशीली दवाओं का व्यापार, और रियल एस्टेट से जुड़े अपराधों में शामिल होते हैं। जैसे कि दाऊद इब्राहिम का डी-कंपनी और मुंबई अंडरवर्ल्ड।
अल्बानियन माफिया – ये अल्बानिया और यूरोप के कुछ हिस्सों में सक्रिय होते हैं और मुख्य रूप से मानव तस्करी, ड्रग तस्करी, और हथियारों के व्यापार में शामिल होते हैं।
आधुनिक साइबर माफिया – आज के डिजिटल युग में साइबर अपराधों का माफिया, जैसे हैकिंग, पहचान चोरी, और रैंसमवेयर हमले में संलग्न है
उत्तराखण्ड में कुछ ऐसे माफिया भी है। जो फर्जी दस्तावेज के आधार पर करोड़ों का भुगतान करा लेते हैं। हरिद्वार की जनता में ऐसा चर्चा का विषय बना हुआ है कि एक विभाग से फर्जी मृत्यु प्रमाण के माध्यम से माफियाओं के द्वारा जारी कर दो – दो लाख कर करोड़ों का भुगतान करा लिया गया है तथा मजदूरों को ट्रेनिंग देने के नाम पर भी करोड़ों का भुगतान ले लिया गया। कई माफिया तो ऐसे भी हैं जिनके घर प्रवर्तन निदेशालय ने छापा भी डाला । ऐसे माफियाओं की डर की वजह से अधिकारी भी उनका साथ देते हैं।
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