नवीन चन्द्र कुरील (चीफ एडिटर, भारत न्यूज़ लाइव)
देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने “डिजिटल उत्तराखंड” के अपने मिशन को गति देने का निर्णय लिया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य आम जनता को विभागों की जानकारी और सरकारी योजनाओं का लाभ एक क्लिक के माध्यम से सरलता से उपलब्ध कराना है।
ई-ऑफिस मोड में काम करने के निर्देश
राज्य सरकार ने सभी सरकारी कार्यालयों को निर्देश दिया है कि वे 2025 की शुरुआत से ई-ऑफिस मोड में काम करना शुरू करें। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि इसके बाद कोई भी पत्र या फाइल बिना ई-हस्ताक्षर के आगे नहीं बढ़ेगी। सरकार ने सभी विभागों को इस संबंध में कड़े आदेश जारी किए हैं।
डिजिटलीकरण की प्रगति
वर्तमान में, उत्तराखंड के 722 सरकारी कार्यालयों में से 584 को पूरी तरह से ई-ऑफिस में परिवर्तित किया जा चुका है। सूचना प्रौद्योगिकी विभाग (ITDA) इस प्रक्रिया को तेज करने के लिए सक्रिय है और सभी अधिकारियों को फाइलों के निस्तारण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।
ई-गवर्नेंस की योजनाएं
उत्तराखंड में ई-गवर्नेंस के तहत कई महत्वपूर्ण योजनाएं चल रही हैं, जिनमें शामिल हैं:
- ई-डिस्ट्रिक्ट: नागरिक सेवाओं का ऑनलाइन वितरण
- ई-हेल्थ: स्वास्थ्य सेवाओं की डिजिटल पहुंच
- टेली मेडिसन: दूरस्थ चिकित्सा सेवाएं
- ई-एजुकेशन: शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल समाधान
- ई-बैंकिंग: बैंकिंग सेवाओं की ऑनलाइन उपलब्धता
- ई-नाम: किसानों को फसल बेचने के लिए प्लेटफार्म प्रदान करना
इसके अलावा, अब कैबिनेट बैठकें भी ई-कैबिनेट के माध्यम से ऑनलाइन आयोजित की जा रही हैं।
पारदर्शिता और जवाबदेही का वादा
सरकार का यह संकल्प है कि सभी सरकारी कार्यों को पूरी तरह से डिजिटल मोड में लाया जाएगा। ई-ऑफिस के पूर्ण कार्यान्वयन से पारदर्शिता बढ़ेगी, जवाबदेही सुनिश्चित होगी और डेटा की सुरक्षा में भी वृद्धि होगी। सभी विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे अगले साल पहली जनवरी तक ई-ऑफिस प्रणाली को अपनाने के लिए तैयारी करें।
यह कदम उत्तराखंड में सरकारी सेवाओं की उपलब्धता को अधिक सरल और त्वरित बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रयास है, जिससे आम जनता को लाभ होगा।



