
देहरादून: सोमवार को प्रस्तावित महाआक्रोश रैली में UPNL (उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड) कर्मचारियों का आक्रोश सरकार की ओर झुका। कर्मचारियों का साफ कहना है कि अगर सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाती है, तो अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी।
नियमितीकरण के लिए उठी पुरजोर मांग
UPNL कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष विनोद गोदियाल और महामंत्री विनय प्रसाद ने इस रैली के पीछे प्रमुख मांग बताते हुए कहा कि राज्य सरकार को हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज एसएलपी पर कोई रिव्यू याचिका दाखिल नहीं करनी चाहिए। साथ ही, 2018 के हाईकोर्ट के आदेश के अनुरूप कर्मचारियों के नियमितीकरण की ठोस नीति बनाई जानी चाहिए। गोदियाल ने कहा कि “हाईकोर्ट का आदेश पहले ही स्पष्ट है, और सुप्रीम कोर्ट भी एसएलपी को खारिज कर चुका है।”
रैली का सचिवालय कूच, कर्मचारियों की एकजुटता
सुबह 10 बजे से परेड मैदान के पास सभी UPNL कर्मचारी इकट्ठा हुए और सचिवालय की ओर कूच किया। इस रैली में महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष मीना रौथाण और कई अन्य प्रमुख नेताओं की उपस्थिति रही। राज्य निगम कर्मचारी महासंघ ने भी UPNL कर्मचारियों को पूर्ण समर्थन देने का ऐलान किया है।
15-20 वर्षों की सेवा के बाद भी नहीं मिला स्थायीत्व
महासंघ के महामंत्री नंदलाल जोशी ने कहा कि UPNL कर्मचारी कई विभागों में 15 से 20 साल से सेवा दे रहे हैं, लेकिन नियमितीकरण को लेकर सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उनका कहना है कि “इन कर्मचारियों को समान काम के लिए समान वेतन मिलना चाहिए और कोर्ट के आदेशों को जल्द लागू करना चाहिए।”
दून अस्पताल में हड़ताल से सेवाएं ठप, मरीजों को परेशानी
रैली में शामिल होने के लिए दून अस्पताल के UPNL कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार किया, जिससे अस्पताल की व्यवस्था पर सीधा असर पड़ा। अस्पताल में पंजीकरण और बिलिंग जैसी सेवाएं बुरी तरह प्रभावित रहीं, जिससे मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ा।ओटी सेवाओं पर पड़ा असर, रोजाना हजारों मरीजों पर संकटदून मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में रोजाना लगभग 2000 मरीज आते हैं। हड़ताल के कारण अस्पताल में ऑपरेशन थिएटर की सेवाएं भी प्रभावित हुईं। केवल छोटे केस ही किए जा सके, जबकि बड़ी सर्जरी में अड़चनें आईं।
निष्कर्ष:UPNL कर्मचारियों की इस महाआक्रोश रैली ने सरकार के लिए एक स्पष्ट संदेश दिया है। यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की जाती हैं, तो इस अस्थिर स्थिति में अनिश्चितकालीन हड़ताल का रास्ता अपनाना कर्मचारियों के लिए एकमात्र विकल्प होगा।


