नई टिहरी: केमसारी–पिपली टीन शेड में रह रहे टिहरी बांध विस्थापितों का धरना पाँचवें दिन भी जारी, मालिकाना हक की मांग तेज l

विक्रम सिंह कठैत ( एडिटर) ,भारत न्यूज़ लाइव
नई टिहरी। टिहरी बांध निर्माण के दौरान विस्थापित हुए परिवारों को अब तक मालिकाना हक न मिलने के विरोध में केमसारी–पिपली टीन शेड में रह रहे विस्थापितों का धरना प्रदर्शन लगातार पाँचवें दिन भी जारी रहा। विस्थापितों का कहना है कि वर्ष 2002 से 2005 के बीच टिहरी बांध परियोजना के कारण जिन परिवारों का समुचित पुनर्वास नहीं हो पाया था, उन्हें जिला प्रशासन एवं पुनर्वास विभाग द्वारा अस्थायी रूप से नई टिहरी के केमसारी–पिपली क्षेत्र में टीन शेड में बसाया गया था।
विस्थापितों ने बताया कि अस्थायी व्यवस्था के रूप में बनाए गए इन टीन शेड्स में रहते हुए अब 25 वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन आज तक उन्हें इन आवासों पर मालिकाना हक नहीं दिया गया। समय के साथ टीन शेड पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं, जिससे आए दिन दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। बरसात और सर्दी के मौसम में हालात और भी बदतर हो जाते हैं। विस्थापित परिवारों का कहना है कि बार-बार ज्ञापन देने और प्रशासन से गुहार लगाने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा है।
धरना स्थल पर आज जिला कांग्रेस कमेटी टिहरी के पूर्व जिलाध्यक्ष राकेश राणा, टिहरी विधानसभा से कांग्रेस के पूर्व प्रत्याशी नरेंद्र चंद रमोला, प्रदेश कांग्रेस महासचिव विजय गुनसोला, प्रदेश कांग्रेस सचिव सैयद मुशर्रफ अली, पूर्व शहर अध्यक्ष देवेंद्र नौडियाल, महिला कांग्रेस की प्रदेश महामंत्री दर्शनी रावत, पूर्व जिला पंचायत सदस्य शांति शाह, जिला उपाध्यक्ष मुर्तजा बेग सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और पदाधिकारी धरना स्थल पर पहुँचे और आंदोलनकारियों को अपना समर्थन दिया।
इस दौरान पूर्व जिलाध्यक्ष राकेश राणा ने कहा कि टिहरी बांध विस्थापितों ने विकास की सबसे बड़ी कीमत चुकाई है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें मूलभूत अधिकारों से वंचित रखा गया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने विस्थापितों के पुनर्वास के लिए कई योजनाओं की बात की, लेकिन जमीनी स्तर पर आज तक कुछ भी नहीं किया गया। वहीं नरेंद्र चंद रमोला ने कहा कि विस्थापित परिवार कई दिनों से धरने पर बैठे हैं, लेकिन जिला प्रशासन और राज्य सरकार पूरी तरह से मौन साधे हुए हैं।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि विधानसभा और लोकसभा चुनावों के दौरान वर्तमान सरकार के प्रतिनिधियों ने विस्थापितों से मालिकाना हक और स्थायी आवास देने के बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही सभी वादे भुला दिए गए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही विस्थापितों को मालिकाना हक नहीं दिया गया, तो आंदोलन को और अधिक व्यापक और उग्र किया जाएगा।
धरना दे रहे विस्थापितों ने सरकार से मांग की है कि उन्हें शीघ्र मालिकाना हक प्रदान किया जाए, ताकि वे सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन जी सकें।
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