भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण संघ ने मनाया नेताजी सुभाष चंद्र बोस का 129वां जन्मदिवस, पराक्रम दिवस के रूप में

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हरिद्वार | 23 जनवरी 2026 — भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण संघ के प्रांतीय कार्यालय पर शुक्रवार को भारत माता के महान सपूत, स्वतंत्रता संग्राम के अमर नायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में अत्यंत श्रद्धा, सम्मान और उत्साह के साथ मनाया गया।

इस अवसर पर संघ के पदाधिकारियों, श्रमिक प्रतिनिधियों एवं सैकड़ों की संख्या में उपस्थित कर्मकारों ने नेताजी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया तथा उनके संघर्षपूर्ण जीवन से प्रेरणा लेने का संकल्प लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता टीयूसीसी केंद्रीय समिति की सचिव श्रीमती सुषमा कुरील ने की।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस केवल एक स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं, बल्कि साहस, त्याग, अनुशासन, राष्ट्रभक्ति और संगठन शक्ति के जीवंत प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि नेताजी का संपूर्ण जीवन यह संदेश देता है कि जब तक समाज का कमजोर वर्ग संगठित नहीं होगा, तब तक उसे न्याय और अधिकार नहीं मिल सकते। उनके विचार आज भी श्रमिक वर्ग को अन्याय, शोषण और असमानता के विरुद्ध एकजुट होकर संघर्ष करने की प्रेरणा देते हैं। इस अवसर पर टीयूसीसी केंद्रीय समिति के सदस्य एवं उत्तराखंड प्रांतीय अध्यक्ष श्री नवीन चंद्र कुरील ने कहा कि नेताजी का संदेश आज के समय में और भी प्रासंगिक हो गया है। उन्होंने कहा कि बिना संगठन के न तो देश की आज़ादी सुरक्षित रह सकती है और न ही श्रमिकों के अधिकार। मजबूत, जागरूक और अनुशासित संगठन ही श्रमिकों की वास्तविक ताकत है, और इसी ताकत के बल पर श्रमिक अपने अधिकारों, सम्मान और सामाजिक सुरक्षा को सुनिश्चित कर सकते हैं।

राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद टीयूसीसी के सदस्य श्री अर्जुन धोनी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि नेताजी द्वारा गठित आज़ाद हिंद फौज आज भी अनुशासन, एकता और साहस की अनुपम मिसाल है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार नेताजी ने सीमित संसाधनों में भी एक सशक्त सैन्य संगठन खड़ा किया, उसी प्रकार श्रमिक आंदोलन को भी अनुशासन और एकजुटता के साथ आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद के सदस्य श्री मंसूर अली ने कहा कि नेताजी का जीवन विशेष रूप से युवाओं और मेहनतकश वर्ग के लिए प्रेरणास्रोत है। उनके विचार हमें अन्याय के सामने झुकने के बजाय डटकर खड़े होने की शक्ति प्रदान करते हैं और आत्मसम्मान के साथ जीवन जीने का मार्ग दिखाते हैं।

टीयूसीसी के प्रांतीय कोषाध्यक्ष श्री सिंटू कुमार ने कहा कि पराक्रम दिवस केवल नेताजी को स्मरण करने का दिन नहीं है, बल्कि यह एक संकल्प लेने का अवसर है, जिसमें श्रमिकों के अधिकार, सम्मान, सुरक्षा और सामाजिक न्याय के लिए निरंतर संघर्ष करने का प्रण लिया जाना चाहिए। कार्यक्रम के दौरान एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक निर्णय भी लिया गया, जिसके अंतर्गत टीयूसीसी के प्रांतीय महासचिव के रिक्त पद पर सर्वसम्मति से श्री सुरेश चंद्र आर्या को नियुक्त किया गया।

उल्लेखनीय है कि श्री आर्या पूर्व में सहायक श्रमायुक्त के पद पर कार्य कर चुके हैं और उन्हें श्रम कानूनों व प्रशासनिक प्रक्रियाओं का व्यापक अनुभव है। उपस्थित सदस्यों और श्रमिक प्रतिनिधियों ने इस निर्णय का तालियों के साथ स्वागत किया और आशा व्यक्त की कि उनके नेतृत्व में संगठन और अधिक सशक्त होगा।

नवनियुक्त प्रांतीय महासचिव श्री सुरेश चंद्र आर्या ने अपने संबोधन में कहा कि श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करना उनका प्रमुख दायित्व रहेगा। उन्होंने कहा कि वे अपने प्रशासनिक अनुभव के आधार पर श्रमिकों को पंजीकरण, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, श्रम कल्याण बोर्ड की सुविधाओं तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ दिलाने के लिए संघ के साथ मिलकर सक्रिय रूप से कार्य करेंगे।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी पदाधिकारियों एवं श्रमिक साथियों ने यह संकल्प लिया कि संघ नेताजी सुभाष चंद्र बोस के आदर्शों, सिद्धांतों और राष्ट्रभक्ति की भावना पर चलते हुए श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए पूरी मजबूती, एकता और निष्ठा के साथ संघर्ष करता रहेगा। इस अवसर पर संघ के पदाधिकारी गौरी शंकर (काशीपुर), सतेंद्र, अरविंद, अभिषेक, बालेश, सुमन, रीता, ममता, शारदा, इशरत अली, टीयूसीसी के उपाध्यक्ष गुरमीत सिंह, सदस्य सत्यपाल सैनी, संदीप सैनी, अशोक कुमार सहित सैकड़ों की संख्या में श्रमिक साथी उपस्थित रहे।



