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देहरादून: उत्तराखंड विधानसभा सत्र का आज चौथा दिन है और इस दौरान विपक्ष ने सदन में नियम 58 के तहत भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सत्ता पक्ष को घेरने की पूरी कोशिश की। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने धामी सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि राज्य में हर जगह भ्रष्टाचार अपने चरम पर है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के विभिन्न विभागों में बाहरी अधिकारियों की भर्ती हो रही है और अवैध खनन धड़ल्ले से जारी है।
उन्होंने विशेष रूप से उद्यान विभाग में हुए महाघोटाले का जिक्र किया और कहा कि यह घोटाला CBI जांच में भी साबित हो चुका है। यशपाल आर्य ने कहा कि इस महाघोटाले में तत्कालीन निदेशक की बड़ी भूमिका रही और जमरानी व सौग में नियमों की अनदेखी कर ठेके आवंटित किए गए। इसके अलावा, हिल स्टेशन मसूरी में पर्यटन विकास परिषद की 142 एकड़ जमीन को मात्र 1 करोड़ रुपये सालाना किराए पर दे दिया गया, जिस पर सवाल उठाते हुए उन्होंने पूछा कि सरकार और अधिकारियों को यह अधिकार किसने दिया। उन्होंने आगे बताया कि एशियन बैंक से 23 करोड़ रुपये का लोन लेकर जमीन का समतलीकरण किया गया और बाद में इसे चहेतों को बांट दिया गया।
उपनेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी ने भी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि सरकार ने नए भ्रष्टाचार के कीर्तिमान स्थापित किए हैं। एक तरफ सरकार बुलडोजर लेकर अवैध निर्माणों पर कार्रवाई कर रही है, तो दूसरी तरफ अपने करीबी लोगों को सस्ती दरों पर जमीन आवंटित कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में NH घोटाला करने वालों को सरकार ने क्लीन चिट दे दी है और आउटसोर्सिंग के माध्यम से बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हो रहा है, जहां कंपनियां छह महीने की सैलरी देकर भाग जा रही हैं और इसके बाद युवा वेतन के लिए भटक रहे हैं। भुवन कापड़ी ने डिजिटल बोर्ड घोटाले का भी जिक्र किया और कहा कि जिन डिजिटल बोर्ड की कीमत 1 लाख रुपये है, सरकार ने उन्हें ढाई-ढाई लाख रुपये में खरीदा, जिससे बड़ा घोटाला हुआ है और इसकी जांच होनी चाहिए।
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