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मस्जिद विवाद को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाली अल्पसंख्यक सेवा समिति ने प्रशासन पर दबाव में काम करने का आरोप लगाया है। समिति के अध्यक्ष इश्तियाक अहमद का कहना है कि सत्तारूढ़ पार्टी के स्थानीय विधायक महापंचायत के मंच पर खुलेआम आए, जिससे विवाद और गहरा गया है। समिति को आशंका है कि मस्जिद से जुड़े दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ हो सकती है।
दस्तावेज़ों की छाया प्रतियां सौंपी, फिर भी संदेह बरकरार
समिति ने प्रशासन को मस्जिद से संबंधित सभी दस्तावेजों की छाया प्रतियां सौंपी हैं। इश्तियाक अहमद ने बताया कि दस्तावेज़ों की तीन-तीन प्रतियां तैयार कर प्रशासन और हाईकोर्ट को भी उपलब्ध कराई गई हैं। बावजूद इसके, प्रशासन द्वारा दस्तावेज़ों पर कूटरचना का संदेह जताया जा रहा है।
एसडीएम की टिप्पणी और समिति की आपत्ति
एसडीएम द्वारा मस्जिद को विवादित स्थल कहे जाने पर समिति ने कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि यह बयान मामले को और अधिक जटिल बना सकता है। समिति ने दस्तावेज़ों की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए बाहरी एजेंसी से जांच कराने की मांग की है।
महापंचायत को दी गई अनुमति पर सवाल
समिति ने महापंचायत को अनुमति देने के प्रशासनिक फैसले पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को हाईकोर्ट में उठाया जाएगा। उनका तर्क है कि महापंचायत जैसी गतिविधियां क्षेत्र में तनाव और विवाद को बढ़ावा दे सकती हैं।
प्रशासन का पक्ष: दस्तावेज़ों से छेड़छाड़ पर फौजदारी कार्यवाही होगी
एसडीएम मुकेश चंद रमोला ने स्पष्ट किया है कि सभी दस्तावेज़ रिकॉर्ड रूम में सुरक्षित हैं। यदि किसी ने दस्तावेज़ों के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश की, तो फौजदारी मुकदमा दर्ज किया जाएगा। उन्होंने समिति को विश्वास दिलाया कि दस्तावेज़ों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
बाहरी एजेंसी से जांच की मांग पर जोर
समिति ने प्रदेश सरकार से अपील की है कि मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए जांच स्थानीय प्रशासन की बजाय किसी बाहरी एजेंसी को सौंपी जाए। उनका कहना है कि ऐसा करने से सभी पक्षों का विश्वास बहाल होगा और विवाद का समाधान निष्पक्ष तरीके से हो सकेगा।


